3,850 बोरी खाद का हिसाब गायब, 43.67 लाख के स्टॉक अंतर पर अब तक एफआईआर नहीं!

बैंक ने पुलिस को लिखी शिकायत, मांगे गए दस्तावेज भी सौंपे; प्रभारी मंत्री खुशवंत साहेब के सामने उठा मामला, तत्काल कार्रवाई के निर्देश
3,377 बोरी की कमी और 473 बोरी पुराने स्टॉक का मामला, कार्रवाई में देरी पर उठे गंभीर सवाल
सक्ती/चंद्रपुर। सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर में खाद के स्टॉक को लेकर सामने आया मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। बैंक के दस्तावेजों में 3,850 बोरी खाद के स्टॉक में अंतर सामने आया है, जिसकी कुल राशि 43 लाख 67 हजार 283 रुपये बताई गई है। मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की चंद्रपुर शाखा द्वारा पुलिस से प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की मांग किए जाने के बावजूद अब तक अपराध पंजीबद्ध नहीं होने से कार्रवाई की गति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बैंक की ओर से मामले में समिति के तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक पिताम्बर निषाद के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। बैंक के अनुसार खाद के स्टॉक के भौतिक सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट सहित आवश्यक दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायत, सत्यापन रिपोर्ट और दस्तावेज उपलब्ध होने के बाद भी एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ी?
3,377 बोरी की कमी, 473 बोरी पुराने स्टॉक का भी हिसाब नहीं
बैंक द्वारा थाना चंद्रपुर को भेजे गए पत्र में खाद स्टॉक की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। वर्ष 2026-27 के स्टॉक के भौतिक सत्यापन के दौरान 3,377 बोरी खाद की कमी पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
वहीं पूर्व वर्षों के 473 बोरी बचत खाद स्टॉक को प्रारंभिक स्टॉक में स्थानांतरित नहीं किए जाने की बात भी सामने आई है।
दोनों आंकड़ों को मिलाने पर कुल 3,850 बोरी खाद का अंतर सामने आता है। बैंक के पत्र में इस खाद की राशि 43,67,283 रुपये बताई गई है।
यही आंकड़ा पूरे मामले को गंभीर बना रहा है। आखिर हजारों बोरियों का यह अंतर कैसे सामने आया? स्टॉक कहां गया? रिकॉर्ड में इसकी क्या स्थिति है? और यदि यह लेखा संबंधी त्रुटि नहीं है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
पास मशीन से स्टॉक रजिस्टर तक, हर रिकॉर्ड की जांच जरूरी
मामले में खाद के वास्तविक स्टॉक और रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। बैंक की ओर से किए गए भौतिक सत्यापन के बाद अब जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि—
- पास मशीन में कितना स्टॉक दर्ज था?
- स्टॉक रजिस्टर में कितनी खाद दर्ज थी?
- मौके पर वास्तव में कितनी खाद उपलब्ध थी?
- किसानों को कितनी खाद वितरित की गई?
- खाद वितरण का रिकॉर्ड क्या कहता है?
- 3,377 बोरी की कमी किस स्तर पर सामने आई?
- पूर्व वर्षों की 473 बोरी खाद का वास्तविक रिकॉर्ड कहां है?
- 43.67 लाख रुपये मूल्य के स्टॉक अंतर की जिम्मेदारी किसकी है?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल इतने बड़े स्टॉक अंतर ने सहकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
10 अगस्त को बैंक ने मांगी थी एफआईआर
मामले में 10 अगस्त 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की चंद्रपुर शाखा की ओर से थाना चंद्रपुर को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई थी। पत्र में खाद स्टॉक में सामने आए अंतर को लेकर आर्थिक अनियमितता की आशंका जताते हुए तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक पिताम्बर निषाद के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया था।
इस तरह मामला केवल विभागीय स्तर की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई के लिए भी पहुंच चुका था।
बैंक की ओर से शिकायत में स्टॉक का विवरण, भौतिक सत्यापन से संबंधित तथ्य और कथित अनियमितता की राशि का उल्लेख किया गया। इसके बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पुलिस ने दस्तावेज मांगे, बैंक ने भी सौंप दिए
मामले में 3 अक्टूबर 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की चंद्रपुर शाखा ने थाना चंद्रपुर को एक और पत्र भेजा। इसमें पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी एवं दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
बैंक के अनुसार समिति की—
कार्यवाही पंजी, खाद बिक्री पंजी, खाद स्टॉक पंजी, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तथा अन्य संबंधित अभिलेख
पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं।
अब जब पुलिस द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं, तो सवाल यह है कि आखिर जांच की अगली कार्रवाई क्या होगी और अपराध पंजीबद्ध करने का निर्णय कब लिया जाएगा?
473 बोरी पुराने स्टॉक ने भी बढ़ाई उलझन
मामले में 473 बोरी पुराने खाद स्टॉक का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। बैंक के पत्र के अनुसार पूर्व वर्ष की बचत खाद के संबंध में दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन संबंधित दस्तावेज समिति में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई।
ऐसे में जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ये 473 बोरी खाद वास्तव में कहां थीं, उनका रिकॉर्ड किस दस्तावेज में था और उन्हें नए प्रारंभिक स्टॉक में शामिल क्यों नहीं किया गया।
एफआईआर नहीं होने पर अब सीधे उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बैंक की शिकायत के बाद भी अब तक अपराध पंजीबद्ध क्यों नहीं हुआ?
जब बैंक ने लिखित शिकायत दी, स्टॉक में अंतर का विवरण उपलब्ध कराया, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट दी और बाद में पुलिस द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी सौंप दिए, तो फिर कार्रवाई किस स्तर पर लंबित है?
क्या पुलिस को दस्तावेजों की जांच के लिए और समय चाहिए? क्या किसी अन्य विभागीय प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है? या फिर एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी अन्य पहलू की जांच की जा रही है?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित जांच एजेंसी की कार्रवाई से ही सामने आएगा।
हालांकि दस्तावेजों में दर्ज स्टॉक अंतर अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। वास्तविक जिम्मेदारी और किसी आपराधिक कृत्य का निर्धारण पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
प्रभारी मंत्री के सामने उठा मामला, तत्काल कार्रवाई के निर्देश
मामले को लेकर अब राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता दिखाई गई है। प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की समीक्षा बैठक में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय ने चंद्रपुर सेवा सहकारी समिति के खाद स्टॉक मामले की जानकारी मंत्री को दी।
उन्होंने मंत्री को 3,850 बोरी खाद के स्टॉक अंतर, करीब 43.67 लाख रुपये की राशि तथा अब तक अपराध पंजीबद्ध नहीं होने की जानकारी से अवगत कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
अब मंत्री के निर्देश के बाद इस मामले में पुलिस एवं संबंधित विभाग की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।
“बैंक ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने के लिए पुलिस को लिखा है”
“बैंक की ओर से तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने के लिए पुलिस को लिखा जा चुका है। अनियमितता करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। प्रभारी मंत्री को भी मामले से अवगत कराया गया है। अब पुलिस को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”
— अश्वनी पाण्डेय
नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जिला सक्ती
अब सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई कब?
3,850 बोरी खाद का स्टॉक अंतर, 43.67 लाख रुपये की राशि, बैंक की शिकायत, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट, पुलिस को सौंपे गए दस्तावेज और अब प्रभारी मंत्री के तत्काल कार्रवाई के निर्देश—इन सबके बाद अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं।
क्या इस मामले में जल्द एफआईआर दर्ज होगी? क्या पूरे स्टॉक का वास्तविक हिसाब सामने आएगा? और यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब अब पुलिस की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट से ही सामने आएंगे।




