सक्ती जिला

आदिवासियों को मिल रहे 32 प्रतिशत आरक्षण को बचाने में समाज को मिली बड़ी जीत 

– विद्या सिदार ने समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी थी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती 

– अब आरक्षण के फैसले पर मिला सुप्रीम कोर्ट से स्टे, समाज में खुशी का माहौल 

सक्ती– आरक्षण मामले में आदिवासी समाज ने बड़ी जीत हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य में 58 प्रतिशत आरक्षण में 32 प्रतिशत आरक्षण आदिवासी समाज को मिल रहा था जिसे कम कर आदिवासियों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला हाई कोर्ट ने दिया था इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने 1 मई को 20 प्रतिशत आरक्षण के फैसले पर रोक लगाई है। आदिवासी समाज की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अखिल भारतीय गोंड़वाना गोंड महासभा एवं प्रदेश उपाध्यक्ष छ.ग., अभा गोंड़ आदिवासी समाज तथा सक्ती जिलाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ, केंद्रीय अध्यक्ष गोंड सगा समाज सक्ती राज श्रीमती विद्या सिदार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इनके अलावा छ.ग. से दो अन्य योगेश ठाकुर एवं प्रकाश ठाकुर (छात्र संघ नेता) ने भी चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदिवासी समाज के हित के लिए लड़ी जा रही इस लड़ाई में अहम फैसला देते हुए आरक्षण को 32 प्रतिशत यथावत रखने के लिए आदेश दिया है। इससे क्षेत्र के आदिवासी समाज के लोगों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। इस अहम फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज को छ.ग. में सभी पदो में भर्ती , प्रमोशन एवं अन्य लाभ मिलेगा। 

    विदित हो कि श्रीमती विद्या सिदार लगातार आदिवासियों के हित की लड़ाई लड़ती रहती हैं। सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट  तक की लड़ाई के लिए विद्या ने आदिवासियों के हितों के लिए साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति के साथ काम किया और 58 प्रतिशत आरक्षण की लड़ाई में मिली सफलता का हिस्सा बनी। श्रीमती विद्या सिदार ने फैसला आने के बाद कहा कि समाज के सभी लोगों की एकजुटता के कारण ही यह सफलता प्राप्त हुई है। आदिवासी समाज की हितों की लड़ाई के लिए सदैव मिलकर काम करने की बात कहते हुए उन्होनें कहा कि जिला सक्ती में संगठनात्मक एवं आदिवासी एकता को और मजबूत करते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए सतत प्रयास करने की बात कही है। उन्होनें कहा कि आरक्षण की इस लड़ाई में आदिवासी समाज जिला सक्ती, जांजगीर व कोरबा के पदाधिकारियों का भी उन्होनें आभार व्यक्त किया है। आदिवासी समाज के सरवन सिदार, जगेश्वर कंवर, जगेश्वर सिंह राज, सतीश नेताम, ईश्वर सिंह, धरम सिंह, रेशम लाल पैकरा, भुवन सिंह कंवर, सम्हन सिंह कवंर, फूलसाय पैकरा, शिव सिंह, दिलेश सिंह, साखन सिंह, भगत सिंह, राम सिंह, ममता उरांव, राम बाई, नीरा सिदार, मालती जगत, गीता सिदार, प्रभात सिंह, रत्थूराम, बुधराम उरांव, मथुरा सिदार, कोईलरिहा सिदार, संतोष सिदार, गिरवर कंवर, नारायण सिंह, शंकर उरांव, प्रहलाद सिंह, जगन्नाथ प्रसाद, शिव कंवर, भास्कर नेताम, होरीलाल नेताम, शिवनाथ सिदार, सीताराम सिदार, संजय सिदार, लीलाधर सिदार, गजाधर सिदार, पिंटू सिदार, गनपत सिदार, केशव सिदार, बजरंग, दिगंबर, सोम प्रकाश करम सिंह, देवेंद्र सिदार, दिलहरण कंवर, कन्हैया सिदार, कुश्वा सिदार, महादेव सिदार, होलेश्वर राठिया, सत्यानंद भुईयां, पाहर सिदार सहित जिला एवं ब्लाक के पदाधिकारियों ने इस फैसले के बाद हर्ष व्यक्त किया है।

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