सक्ती जिला

गौ सेवा के लिए मिसाल बने नगर के युवा , घायल व बीमार गौवंशीय पशुओं का कर रहे इलाज

गौ मालिकों से अपील कर रहे हैं कि वे आवारा न छोड़े बल्कि गौ सेवा का बीड़ा उठाते हुए उनकी सेवा करें

सक्ती–  नगर के कुछ युवाओं का दल इन दिनों गौ सेवा कर अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। सड़कों में बैठी गाय आए दिन दुर्घटना की शिकार हो जाती है और उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में पशुओं की भावनाओं को समझने का बीड़ा उठाया है मयंक सिंह के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने जिनको खबर लगते ही पहुंच जाते हैं बेजुबानों के जख्म को ठीक करने। नगर में इनकी सेवा भावना एक मिसाल बन चुकी है। कहीं से भी सुचना मिलते ही ये गौ सेवक दवाईयों और पर्याप्त मरहम पट्टी के साथ घटना स्थल पहुंच जाते हैं और पूरे तन मन और धन से सेवा करते हैं। गौ सेवा समिति के सदस्य लगातार गौ मालिकों से अपील कर रहे हैं कि वे आवारा न छोड़े बल्कि गौ सेवा का बीड़ा उठाते हुए उनकी सेवा करें। नेशनल हाइवे में जिस प्रकार आए दिन गायों की मौत हो रही है उसने गौ सेवकों का मन व्यथित कर दिया है लेकिन फिर भी उनकी सेवा ने लोगों का दिल जीत लिया है। नगर के गौ सेवक व राष्ट्रीय गौ रक्षा वाहिनी के जिला अध्यक्ष मयंक सिंह ने बताया कि गाय केवल एक पशु नही है बल्कि उसे माता का दर्जा दिया गया है। गौ माता भूत और भविष्य की जननी है। उनकी सेवा करना सभी का धर्म है।

कई गायों को बचाया राखड़ के दलदल से-

 विगत दिनों गौ वंशीय पशुओं के राखड़ के दलदल में फंसने की खबरें आ रही थी, बहुत सी गायों का रेस्क्यू कर उनकी जान को बचाया गया है। प्रशासन से भी अनुरोध किया गया है कि राखड़ डालने वाले लोगो के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाये। जिन बेजुबानों पर नजर पड़ जाती है उनको तो बचा लिया जाता है लेकिन जिनके बारे में पता नही चल पाता है उनकी मौत हो जाती है। नगर के युवा मयंक सिंह,हर्ष अग्रवाल, कामेश सोनी, स्वप्निल चौबे, सुमित पारिक, आशीष पटेल, सोमेश सोनी का गौ सेवा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान है।

गायों को बचाने लगाया था रेडियम का पट्टा-

रात में अक्सर सड़कों में बैठी हुई गाय दिखाई नहीं देती है और भारी वाहनों के चपेट में आ जाती है। गले में रेडियम का पट्टा गौ सेवकों ने लगाया था ताकि रात में भी वाहन चालकों को गाय दिखाई दे और किसी तरह दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके। 

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