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सक्ती में आज सजेगी धुनुची नृत्य की भव्य महफिल, बंगाली संस्कृति के रंग में रंगेगा दुर्गा पूजा पंडाल

67वें वर्ष में प्रवेश कर चुका रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक दुर्गोत्सव, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा की मिसाल

सक्ती। नगर के रेलवे स्टेशन स्थित सार्वजनिक श्री श्री गणेश, दुर्गा एवं काली पूजा पंडाल में सोमवार, 19 अक्टूबर को संध्या 7 बजे आरती के पश्चात बंगाली संस्कृति के प्रसिद्ध धुनुची नृत्य की भव्य प्रस्तुति होगी। श्री श्री दुर्गा एवं काली पूजा उत्सव समिति तथा बंग बंधु बांग्ला समाज समिति, सक्ती के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में महिला कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण में बंगाली लोकसंस्कृति की छटा बिखेरेंगी।

67 वर्षों से कायम है आस्था और एकता की परंपरा

रेलवे स्टेशन स्थित यह दुर्गा पूजा पंडाल सक्ती की पुरानी दुर्गा पूजा परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इस वर्ष सार्वजनिक श्री श्री गणेश, दुर्गा एवं काली पूजा महोत्सव अपने 67वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। लगभग सात दशकों की यह गौरवशाली यात्रा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सद्भाव की मिसाल है।

इस आयोजन की शुरुआत बंग समुदाय, सक्ती में कार्यरत विभिन्न राज्यों के रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से हुई थी। सीमित संसाधनों से शुरू हुई यह परंपरा आज नगर के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो गई है। वर्षों से विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता ने इस उत्सव को सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक बना दिया है।

ढाक की थाप पर प्रस्तुत होगा धुनुची नृत्य

बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में धुनुची नृत्य का विशेष महत्व है। धूप से भरे पारंपरिक धुनुची पात्र और ढाक की गूंजती थाप के बीच प्रस्तुत किया जाने वाला यह नृत्य मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है।

कार्यक्रम में अदिति देवाशीष बनर्जी, मल्लिका कबीराज, मंजू नाथ, मोनालिसा भौमिक तथा यशा, तृष्णा एवं सुशीला अपनी प्रस्तुतियां देंगी। पारंपरिक संगीत, धूप की सुगंध और कलाकारों की लयबद्ध प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या को खास बनाएगी।

नगरवासियों से शामिल होने की अपील

आयोजन समिति ने नगरवासियों, धर्मप्रेमी नागरिकों, कला प्रेमियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सोमवार, 19 अक्टूबर को संध्या 7 बजे आरती के पश्चात रेलवे स्टेशन स्थित दुर्गा पूजा पंडाल पहुंचकर धुनुची नृत्य का आनंद लें और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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