सक्ती जिला

प्रदेशभर में एक साथ आंदोलनकारी तैयारी, खाद-बीज संकट, महंगे डीजल पेट्रोल को लेकर भारतीय किसान संघ कल ज्ञापन सौंपेगा

शक्ति। किसानों की विभिन्न जटिल एवं विवादास्पद समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ अब प्रदेश के व्यापक स्तर पर आंदोलनकारी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। संघ के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में 22 मई को वर्चुअल बैठक आयोजित की गई, जिसमें खाद, बीज, डीजल, पेट्रोल एवं किसानों से जुड़ी अन्य स्थानीय समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

किसानों की वर्तमान स्थिति और खेती-किसानी में आ रही परेशानियों को चिकनाई से लेते हुए यह निर्णय लिया गया कि भारतीय किसान संघ द्वारा 27 मई को प्रदेश के सभी तहसील मुख्यालयों में एक ही दिन ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसान संघ के अध्यक्ष ने कहा कि खरीफ सीजन नजदीक आने के बावजूद किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद और गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से खेती की लागत में भारी वृद्धि हो रही है ट्रैक्टर, पंप, कृषि यंत्र और परिवहन पर बढ़ते खर्च का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। किसान संघ का कहना है कि खेती पहले ही घाटे का सौदा बन रही है, ऐसे में बढ़ती लागत ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि केवल खाद-बीज और ईंधन मूल्य में वृद्धि ही नहीं, बल्कि विभिन्न तहसीलों और गांवों में किसानों को जिन स्थानीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें भी ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंच जाएगा। संघ का मानना है कि यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर संगठन लगातार संघर्ष कर रहा है और किसानों के आंदोलनों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी। संघ ने प्रदेशभर के किसानों, कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से अपील की है कि वे 27 मई को आयोजित ज्ञापन कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इसे सफल बनाएं, ताकि किसानों की आवाज शासन तक मजबूती से पहुंच सके। भारतीय किसान संघ का कहना है कि यह केवल ज्ञापन कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों के हक और अधिकारों की लड़ाई का महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें सभी किसानों की भागीदारी आवश्यक है।

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