सक्ती जिलासक्ती नगर

सिंघीतराई का वेदांता पावर प्लांट बंद, 1000 से अधिक परिवारों पर रोज़ी-रोटी का संकट


बॉयलर हादसे के बाद ठप उत्पादन, जांच जारी, पुनः संचालन को लेकर अनिश्चितता


सक्ती, छत्तीसगढ़। जिले के सिंघीतराई स्थित Vedanta Power (पूर्व में “एथेना छत्तीसगढ़ पावर”) में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर हादसे के बाद से प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। 1200 मेगावाट क्षमता वाले इस बड़े औद्योगिक संयंत्र के ठप होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। इस दुखद दुर्घटना में अब तक 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद प्लांट परिसर में दहशत का माहौल है और कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।


जांच और सुरक्षा के चलते बंद हुआ संचालन
घटना के तुरंत बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बॉयलर यूनिट में तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ। सुरक्षा मानकों की समीक्षा और आवश्यक सुधार कार्य पूरे होने तक प्लांट प्रबंधन ने संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है।


रोजगार पर गहरा असर
प्लांट बंद होने से सीधे और परोक्ष रूप से जुड़े करीब 1000 से अधिक परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। यहां कार्यरत मजदूरों, ठेका श्रमिकों, ट्रांसपोर्टरों, स्थानीय दुकानदारों और अन्य सेवा प्रदाताओं की आय पूरी तरह प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्लांट क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार था। इसके बंद होने से न केवल रोजगार प्रभावित हुआ है, बल्कि आसपास के छोटे व्यवसाय भी ठप पड़ने लगे हैं।


अनिश्चितता के बीच बढ़ी चिंता
प्लांट के दोबारा शुरू होने को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों के अनुसार मरम्मत कार्य, सुरक्षा परीक्षण और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद ही संचालन बहाल किया जा सकेगा।
इस बीच प्रभावित परिवारों में चिंता बढ़ती जा रही है। रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।


राहत और पुनर्वास की मांग
स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों ने शासन एवं कंपनी प्रबंधन से प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत पैकेज, आर्थिक सहायता और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच और मरम्मत कार्य कब तक पूरा होता है और यह महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई दोबारा कब चालू हो पाती है। तब तक क्षेत्र के सैकड़ों परिवार अनिश्चितता और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं।

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