सक्ती जिला

ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों की मनमानी के खिलाफ औषधि विक्रेताओं का बंद, तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिलेभर में मेडिकल दुकानें रहीं बंद


ई-फार्मेसी नीति वापस लेने और भारी छूट पर रोक लगाने की मांग, व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ जताया विरोध

सक्ती। जिले में आज औषधि विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का बंद रखा गया। संघ की तीन सूत्रीय मांगों को लेकर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की  दवा दुकानें बंद रहीं। बंद के कारण मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। दवा व्यापारियों ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे आंदोलन और तेज किया जाएगा।

GSR 817 अधिसूचना रद्द करने की मांग :-

औषधि विक्रेता संघ ने केंद्र सरकार से अधिसूचना GSR 817 (E) को तत्काल रद्द करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि इस अधिसूचना के जरिए ई-फार्मेसी यानी ऑनलाइन दवा बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे बिना उचित भौतिक सत्यापन के दवाइयों की बिक्री हो रही है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।

विजय डालमिया ने कहा – छोटे मेडिकल स्टोरों पर मंडरा रहा संकट :-

औषधि विक्रेता संघ के पदाधिकारी विजय डालमिया ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोरों का व्यापार लगातार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्थानीय दवा विक्रेताओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए। विजय डालमिया ने कहा कि “दवा व्यवसाय केवल व्यापार नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है। बिना नियंत्रण के ऑनलाइन बिक्री से गलत दवाइयों की सप्लाई और नियमों के उल्लंघन की आशंका बढ़ रही है।”



कोविड कालीन GSR 220 अधिसूचना वापस लेने की मांग :-

संघ की दूसरी प्रमुख मांग कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई अधिसूचना GSR 220 (E) को वापस लेने की है। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के समय दवाइयों की होम डिलीवरी की अनुमति अस्थायी व्यवस्था के रूप में दी गई थी, लेकिन अब महामारी समाप्त होने के बावजूद बड़ी कॉरपोरेट ई-फार्मेसी कंपनियां उसी नियम का फायदा उठाकर बड़े स्तर पर कारोबार कर रही हैं।

भारी छूट से छोटे व्यापारियों को नुकसान :-

औषधि विक्रेताओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के नियमों के अनुसार पारंपरिक दुकानदारों का मार्जिन सीमित रहता है, जबकि ऑनलाइन कंपनियां 20 से 60 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। इससे छोटे मेडिकल स्टोर आर्थिक संकट में आ गए हैं।

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी :-

दवा व्यापारियों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दवा विक्रेता अपनी जायज मांगों को लेकर एकजुट हैं और जरूरत पड़ने पर प्रदेश स्तर पर बड़ा प्रदर्शन भी किया जाएगा।

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