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YOUR VOICE की खबर का बड़ा असर: 43.67 लाख की खाद का हिसाब गायब, 3,850 बोरी स्टॉक में भारी गड़बड़ी के बाद आखिरकार चंद्रपुर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, बैंक महीनों से मांग रहा था कार्रवाई, मंत्री की समीक्षा बैठक में भी उठा था मामला

10 अगस्त से पुलिस के पास थी शिकायत और दस्तावेज, 3 अक्टूबर को फिर सौंपे गए अभिलेख; 4 अक्टूबर को अपराध दर्ज होने के बाद अब खुलेगा खाद स्टॉक में हुई कथित गड़बड़ी का पूरा राजसक्ती। सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर में खाद के स्टॉक में सामने आई 43 लाख 67 हजार 283 रुपये की कथित आर्थिक अनियमितता के मामले में आखिरकार पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। YOUR VOICE द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद कार्रवाई तेज हुई और 4 अक्टूबर 2026 को थाना चंद्रपुर में एफआईआर दर्ज की गई। इससे पहले बैंक की ओर से कई बार कार्रवाई की मांग की जा चुकी थी और संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए थे। मामले को प्रभारी मंत्री खुशवंत साहेब की समीक्षा बैठक में भी उठाया गया था।

सक्ती। सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर में खाद के स्टॉक में सामने आई 43 लाख 67 हजार 283 रुपये की कथित आर्थिक अनियमितता के मामले में आखिरकार पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। YOUR VOICE द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद कार्रवाई तेज हुई और 4 अक्टूबर 2026 को थाना चंद्रपुर में एफआईआर दर्ज की गई। इससे पहले बैंक की ओर से कई बार कार्रवाई की मांग की जा चुकी थी और संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए थे। मामले को प्रभारी मंत्री खुशवंत साहेब की समीक्षा बैठक में भी उठाया गया था।

एफआईआर में सेवा सहकारी समिति चंद्रपुर के पूर्व प्रभारी संस्था प्रबंधक पिताम्बर निषाद के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

3,850 बोरी खाद का हिसाब गायब, 43.67 लाख के स्टॉक अंतर पर अब तक एफआईआर नहीं!

इस खबर का हुआ है असर

3,850 बोरी खाद के स्टॉक में मिला अंतर

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, बिलासपुर की चंद्रपुर शाखा द्वारा कराए गए खाद के भौतिक सत्यापन में वर्ष 2026-27 के स्टॉक में 3,377 बोरी खाद की कमी सामने आई। इसके अलावा पूर्व वर्षों की 473 बोरी बचत खाद का स्टॉक भी प्रारंभिक स्टॉक में स्थानांतरित नहीं पाए जाने की बात सामने आई।

दोनों आंकड़ों को मिलाने पर कुल 3,850 बोरी खाद का अंतर सामने आया। बैंक के दस्तावेजों में इसकी कीमत 43,67,283 रुपये बताई गई है। इतनी बड़ी मात्रा में खाद के स्टॉक का हिसाब नहीं मिलने से पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

पास मशीन से लेकर स्टॉक रजिस्टर तक जांच के दायरे में

अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि समिति की पास मशीन में कितना स्टॉक दर्ज था, स्टॉक रजिस्टर में कितनी खाद दर्ज थी और भौतिक सत्यापन के समय मौके पर वास्तव में कितना स्टॉक उपलब्ध था।

इसके साथ ही किसानों को वितरित खाद, खाद बिक्री पंजी, स्टॉक पंजी और वितरण संबंधी रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 3,377 बोरी खाद का अंतर आखिर किस स्तर पर पैदा हुआ और 473 बोरी पुराने स्टॉक का हिसाब कहां गया?

10 अगस्त को ही बैंक ने मांगी थी एफआईआर

इस मामले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की चंद्रपुर शाखा ने 10 अगस्त 2026 को थाना चंद्रपुर को पत्र भेजकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

बैंक ने मामले को आर्थिक अनियमितता/गबन से संबंधित बताते हुए तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक पिताम्बर निषाद के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की थी। बैंक की ओर से खाद के स्टॉक के भौतिक सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए थे।

पुलिस ने दस्तावेज मांगे, बैंक ने फिर उपलब्ध कराए

मामले में पुलिस द्वारा मांगी गई अतिरिक्त जानकारी और दस्तावेज भी बैंक ने उपलब्ध कराए। 3 अक्टूबर 2026 को बैंक शाखा की ओर से थाना चंद्रपुर को भेजे गए पत्र में समिति की कार्यवाही पंजी, खाद बिक्री पंजी, खाद स्टॉक पंजी, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट सहित अन्य संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।

इसके बावजूद एफआईआर दर्ज होने में देरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब अपराध दर्ज होने के बाद पुलिस जांच के दौरान इन दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

473 बोरी खाद के दस्तावेज भी नहीं मिले

मामले में पूर्व वर्ष की 473 बोरी बचत खाद भी जांच के केंद्र में है। बैंक के अनुसार इन खाद के संबंध में मांगे गए दस्तावेज समिति में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई थी।

अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि यह खाद वास्तव में कहां थी, उसका वितरण हुआ या नहीं और उससे संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं था।

प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठक में भी गूंजा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्रभारी मंत्री खुशवंत साहेब की समीक्षा बैठक में भी उठाया गया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय ने मंत्री को 3,850 बोरी खाद के स्टॉक में अंतर और करीब 43.67 लाख रुपये की कथित अनियमितता की जानकारी दी।

साथ ही मामले में अब तक अपराध पंजीबद्ध नहीं होने की स्थिति से भी अवगत कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

“अनियमितता करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा”

जिला सहकारी बैंक के जिला सक्ती नोडल अधिकारी अश्वनी पाण्डेय ने कहा कि बैंक की ओर से तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने के लिए पुलिस को लिखा जा चुका था। अनियमितता करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा। प्रभारी मंत्री को भी मामले से अवगत कराया गया है। अब पुलिस को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

अब पुलिस जांच में खुलेगा पूरा राज

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस द्वारा समिति के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री पंजी, पास मशीन का रिकॉर्ड, भौतिक सत्यापन रिपोर्ट और खाद वितरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

मामला अब सिर्फ विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहा है। पुलिस जांच में यह सामने आना बाकी है कि 43.67 लाख रुपये मूल्य की 3,850 बोरी खाद के स्टॉक में अंतर कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और इस कथित अनियमितता में किसी अन्य की भूमिका थी या नहीं।

YOUR VOICE की खबर के बाद हुई एफआईआर ने अब पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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