बॉयलर हादसे की होगी परत-दर-परत जांच, 30 दिन में रिपोर्ट

सक्ती। जिले के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में तकनीकी खराबी के चलते हुए विस्फोट में 12 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 34 श्रमिक गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। घायलों का इलाज रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों—फोर्टिस जिंदल, अपेक्स एवं बालाजी मेट्रो—में जारी है।
से हुआ हादसा?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बॉयलर के स्टीम पाइप के वॉटर सप्लाई जॉइंट में तकनीकी खराबी के कारण अचानक दबाव बढ़ा और तेज धमाका हुआ। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
प्रशासन सख्त, जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच का जिम्मा अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) डभरा को सौंपा गया है। यह जांच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 196 के तहत की जा रही है।
जांच के प्रमुख बिंदु
जांच अधिकारी को निम्न बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं—
– हादसा कब और कैसे हुआ?
– घटना के समय कौन-कौन मजदूर ड्यूटी पर थे?
– मृतकों और घायलों की सूची
– हादसे के पीछे तकनीकी या मानवीय लापरवाही
– प्लांट में पहले हुए निरीक्षण और पाई गई खामियां
– जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की पहचान
– भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपाय
30 दिन में रिपोर्ट
जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इतनी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई या मेंटेनेंस में भारी चूक हुई? यह हादसा न सिर्फ औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि प्रशासन और कंपनी की जवाबदेही भी तय करेगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।




