सक्ती जिलासक्ती नगर

सक्ती जिले में भर्राशाही चरम पर: डुमरपारा के गुप्ता स्टोन क्रेशर पर बढ़ा घेरा: अवैध भंडारण, शासकीय भूमि कब्जा और बेनामी संपत्ति के जरिए डोलोमाइट उत्खनन के गंभीर आरोप, शिकायतों के बाद भी मूकदर्शक बना प्रशासन

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं

सक्ती। जिले के ग्राम डुमरपारा स्थित गुप्ता स्टोन क्रेशर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। क्रेशर संचालक द्वारिका प्रसाद गुप्ता पर निजी भूमि में अवैध रूप से डोलोमाइट गिट्टी का भंडारण करने, शासकीय भूमि पर स्थायी बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जा करने तथा बेनामी संपत्तियों के आधार पर डोलोमाइट उत्खनन एवं भंडारण पट्टा संचालित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। भाजपा किसान मोर्चा जिला सक्ती के जिला मंत्री नरेश चंद्रा ने कलेक्टर सहित मुख्यमंत्री, खनिज संसाधन विभाग, पर्यावरण मंडल, खान सुरक्षा महानिदेशालय और अन्य विभागों को शिकायत सौंपकर उच्चस्तरीय जांच तथा कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले ने प्रशासनिक और खनिज विभाग के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। शिकायतों में शासन को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का दावा करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

निजी भूमि पर डोलोमाइट गिट्टी के अवैध भंडारण का आरोप :- 

कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम डुमरपारा में संचालित गुप्ता स्टोन क्रेशर द्वारा निर्धारित भंडारण स्थल से अलग निजी भूमि पर भारी मात्रा में डोलोमाइट गिट्टी का भंडारण किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कार्य खनिज विभाग के नियमों के विपरीत है और बिना अनुमति खनिज सामग्री का भंडारण कर अवैध लाभ अर्जित किया जा रहा है। आवेदन में माइनिंग विभाग की टीम भेजकर मौके की जांच कराने तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

शासकीय भूमि पर स्थायी बाउंड्रीवाल बनाकर कब्जे का दावा :- 

दूसरे शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि क्रेशर परिसर से लगी शासकीय भूमि पर स्थायी बाउंड्रीवाल का निर्माण कर कब्जा किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार सरकारी जमीन का निजी उपयोग किया जा रहा है, जो राजस्व नियमों का सीधा उल्लंघन है। शिकायत में राजस्व विभाग से सीमांकन कराकर कथित अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

बेनामी संपत्तियों के जरिए डोलोमाइट उत्खनन का गंभीर आरोप :-

मामले का सबसे गंभीर पक्ष बेनामी संपत्तियों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता नरेश चंद्रा ने आरोप लगाया है कि बिलासपुर निवासी द्वारिका प्रसाद गुप्ता को ग्राम डुमरपारा एवं लोहराकोट क्षेत्र में डोलोमाइट उत्खनन एवं भंडारण के लिए आवंटित खनिज पट्टों के संचालन में बेनामी संपत्तियों का उपयोग किया गया है। शिकायत के अनुसार वर्षों से इन संपत्तियों के आधार पर खनन कार्य संचालित किया जाता रहा, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की जांच कर राजस्व हानि का आकलन करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत कार्रवाई का हवाला :- 

आवेदन में दावा किया गया है कि रायपुर स्थित बेनामी निषेध इकाई द्वारा बेनामी संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1988 के तहत जांच के बाद लक्ष्मीचंद मरावी और ओंकार सिंह गोंड के नाम दर्ज संपत्तियों को द्वारिका प्रसाद गुप्ता की बेनामी संपत्ति माना गया। शिकायत के अनुसार। लक्ष्मीचंद मरावी प्रकरण में 28 दिसंबर 2023 को प्रोविजनल अटैचमेंट तथा 3 जनवरी 2024 को फाइनल अटैचमेंट की कार्रवाई की गई। इस मामले में अपीलेट ट्रिब्यूनल (सफेमा) ने 5 फरवरी 2026 को अपील खारिज कर दी। ओंकार सिंह गोंड प्रकरण में 22 जुलाई 2021 को प्रोविजनल अटैचमेंट तथा 28 फरवरी 2022 को फाइनल अटैचमेंट की कार्रवाई की गई। इस मामले में भी 19 दिसंबर 2024 को अपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा अपील निरस्त किए जाने का उल्लेख किया गया है।

माइनिंग विभाग और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल :- 

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज संबंधित तहसीलदार, उप पंजीयक, एसडीओ, कलेक्टर और जिला पंजीयक कार्यालयों को भेजे जाने के बावजूद खनिज विभाग द्वारा तथ्यों की अनदेखी करते हुए खनन गतिविधियों को जारी रहने दिया गया। आवेदन में संबंधित माइनिंग अधिकारियों की भूमिका की जांच, कथित राजस्व नुकसान का मूल्यांकन, राशि की वसूली तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। 

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, उठने लगे सवाल:- 

मामले का सबसे चर्चित पहलू यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा दस्तावेजों और विभिन्न विभागों के आदेशों के साथ शिकायतें प्रस्तुत किए जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। न तो कथित अवैध भंडारण को लेकर कोई सार्वजनिक कार्रवाई की जानकारी मिली है और न ही शासकीय भूमि पर कथित कब्जे अथवा बेनामी संपत्तियों से जुड़े आरोपों पर किसी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। शिकायतकर्ता नरेश चंद्रा का कहना है कि मामला लंबे समय से विभिन्न विभागों के संज्ञान में होने के बावजूद कार्रवाई का अभाव कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की गई होती तो शासन को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को रोका जा सकता था।

भाजपा किसान मोर्चा ने उठाए बड़े सवाल :- 

भाजपा किसान मोर्चा जिला सक्ती के जिला मंत्री नरेश चंद्रा ने कहा कि शासन की जमीन, खनिज संपदा और राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में संचालित खदानों और स्टोन क्रेशरों की नियमित निगरानी आवश्यक है, ताकि खनिज संसाधनों के दोहन, पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और राजस्व हानि जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

कई विभागों को भेजी गई शिकायत, कार्रवाई का इंतजार :- 

शिकायत कलेक्टर सक्ती, मुख्यमंत्री, खनिज संसाधन विभाग, भौतिक एवं खनिकर्म संचालनालय, ऑडिटर जनरल, खान सुरक्षा महानिदेशालय, पर्यावरण संरक्षण मंडल, प्रभारी मंत्री सहित कई विभागों को भेजी गई है। शिकायत के साथ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। मामले के सामने आने के बाद डुमरपारा सहित आसपास के क्षेत्रों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों में सच्चाई है तो प्रशासन को तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं कुछ लोग पूरे मामले को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी देख रहे हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद अवैध भंडारण, शासकीय भूमि कब्जे और बेनामी संपत्तियों के माध्यम से खनन संचालन के आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है तथा प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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