सक्ती जिला

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने बीआरसी चयन हेतु आवेदन आमंत्रित

15 जून तक कर सकेंगे आवेदन, चयनित क्लस्टरों में किसानों को मिलेगा जैव-आदान एवं तकनीकी सहयोग

सक्ती। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने और किसानों को जैविक आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यालय उप संचालक कृषि, जिला सक्ती द्वारा नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ) योजना अंतर्गत बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) के चयन हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। चयनित बीआरसी किसानों को जैव उत्पाद एवं आदान सामग्री उपलब्ध कराने, प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण तथा विपणन सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीआरसी के माध्यम से प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जैव-आदानों की तैयारी, जीवंत प्रदर्शन, किसानों को इनके उपयोग, मात्रा एवं भंडारण संबंधी जानकारी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा विकासखंड क्रियान्वयन टीम, कृषि सखी, चयनित किसानों, फार्मर मास्टर ट्रेनर एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।


जिले के चयनित क्लस्टर ग्राम धनपुर, गुड़वा (विकासखंड सक्ती), सारसकेला (विकासखंड मालखरौदा) तथा बरदुली (विकासखंड जैजैपुर) में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसान, स्व-सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी संस्थाएं, स्थानीय ग्रामीण उद्यमी, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) तथा राज्य द्वारा चिन्हित अन्य एजेंसियां आवेदन कर सकती हैं।


इच्छुक आवेदक 15 जून 2026 को शाम 5 बजे तक निर्धारित प्रपत्र में आवेदन कार्यालय उप संचालक कृषि, जिला सक्ती में स्वयं उपस्थित होकर अथवा स्पीड पोस्ट एवं पंजीकृत डाक के माध्यम से जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र का प्रारूप एवं विस्तृत जानकारी जिला कृषि कार्यालय तथा संबंधित विकासखंड कृषि सेवा केंद्रों से प्राप्त की जा सकती है।


बीआरसी चयन के लिए निर्धारित अर्हताएं
बीआरसी के लिए आवेदन करने वाले उद्यमी, समूह अथवा संस्था का प्राकृतिक खेती से जुड़ा होना आवश्यक है अथवा उसके सदस्यों को प्राकृतिक खेती का पूर्व अनुभव होना चाहिए। चयनित बीआरसी को अपने खेतों में प्राकृतिक जैव-आदानों का उपयोग करना अनिवार्य होगा।


कृषि विभाग के अनुसार बीआरसी के पास पशुधन, पौध आधारित बायोमास तथा अन्य आवश्यक कच्ची सामग्री की उपलब्धता होना जरूरी है। साथ ही गोबर एवं गौमूत्र की पर्याप्त व्यवस्था के लिए निकटवर्ती गौशालाओं से समन्वय होना चाहिए, अधिमानतः संबंधित ग्राम पंचायत के भीतर। जैव-आदानों के निर्माण एवं तैयार उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान की उपलब्धता भी अनिवार्य शर्तों में शामिल है।


विभाग ने बताया कि यदि किसी चिन्हित क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने वाला किसान उपलब्ध नहीं होता है, तो राज्य प्राकृतिक खेती सेल ऐसे प्रशिक्षित एवं इच्छुक किसान उद्यमी की पहचान कर सकता है, जो आगामी फसल सीजन से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए तैयार हो।


कृषि विभाग का मानना है कि बीआरसी की स्थापना से जिले में प्राकृतिक खेती को नई गति मिलेगी तथा किसानों को रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में टिकाऊ एवं लागत प्रभावी खेती अपनाने में सहायता प्राप्त होगी।

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