लीज अवधि से पहले डोलोमाइट खदान का खनिज समाप्त करने का आरोप, भौतिक सत्यापन की मांग को लेकर खनिज संचालक को शिकायत

सक्ती। जिले के ग्राम लोहराकोट स्थित गुप्ता स्टोन माइंस के संचालक हरिकृष्ण प्रसाद गुप्ता के विरुद्ध खदान में निर्धारित अवधि से पहले अत्यधिक खनन किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता नरेंद्र चन्द्रा ने खनिज विभाग से भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार ग्राम लोहराकोट, तहसील जैजैपुर, जिला इस संबंध में एक लिखित शिकायत संचालक, भौमिक एवं खनिकर्म विभाग, रायपुर को भेजी गई है।
50 वर्ष की लीज, लेकिन खदान बंद होने का दावा :-
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि ग्राम लोहराकोट में स्थित डोलोमाइट खदान, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 4.747 हेक्टेयर (11.73 एकड़) है, को वर्ष 2018 से 2068 तक 50 वर्षों के लिए लीज पर स्वीकृत किया गया था। आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में ही भारी वाहनों के माध्यम से दिन-रात बड़े पैमाने पर उत्खनन कर खदान से अधिकांश डोलोमाइट खनिज निकाल लिया गया, जिसके कारण खदान बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है।
राजस्व हानि और नियम उल्लंघन का आरोप :-
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि खदान से वास्तविक उत्खनन की तुलना में केवल रॉयल्टी पर्चियों के आधार पर खनिज विभाग में विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि होने तथा खनन योजना के नियमों का उल्लंघन होने की आशंका जताई गई है।
इन खसरों पर स्वीकृत है डोलोमाइट खदान :-
शिकायत के अनुसार ग्राम लोहराकोट, तहसील जैजैपुर, जिला सक्ती स्थित डोलोमाइट खदान खसरा नंबर 406, 407/1, 407/2, 407/3, 408, 411, 413, 414/2, 415/1, 415/2, 416, 417, 418, 419, 420, 421/1, 421/2, 423/1, 423/2 एवं 423/3 में स्थित है। खदान का कुल रकबा 4.747 हेक्टेयर (लगभग 11.73 एकड़) बताया गया है।
बेनामी संपत्ति घोषित होने के बावजूद सवालों के घेरे में प्रशासन :-
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार जिस भूमि को लेकर विवाद है, उसे ट्रिब्यूनल कोर्ट के निर्णय में बेनामी संपत्ति घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद संबंधित भूमि पर अब तक प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी संपत्ति को सक्षम न्यायिक अथवा वैधानिक प्राधिकरण द्वारा बेनामी घोषित किया गया है, तो संबंधित विभागों को नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर कार्रवाई में देरी का कारण क्या है?
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग :-
आवेदन में मांग की गई है कि खनिज विभाग के अधिकारी शिकायतकर्ता की उपस्थिति में खदान का भौतिक सत्यापन कराएं तथा खदान की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का मापन कर वास्तविक उत्खनन की जांच करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित खदान संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। शिकायत की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, खनिज संसाधन विभाग, श्रम मंत्रालय, डीजीएमएस तथा कलेक्टर सक्ती सहित विभिन्न कार्यालयों को भी प्रेषित की गई है।




