सक्ती जिला

मानसून की सुस्त चाल से थमी खेतों की रौनक, राहत की बारिश का इंतजार कर रहे किसान

जिले में मानसून की देरी का दिखने लगा असर, खेत तैयार लेकिन पानी के अभाव में रुके कृषि कार्य

सक्ती। जिले में मानसून की देरी का असर अब खेतों और किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई देने लगा है। जून का तीसरा सप्ताह बीतने को है, लेकिन अब तक अपेक्षित बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की शुरुआत सुस्त पड़ गई है। आसमान में रोजाना बादलों का डेरा जरूर लग रहा है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें बार-बार टूट रही हैं। खेतों की जुताई, मेढ़बंदी और नर्सरी तैयार करने जैसे शुरुआती कार्य अधिकांश स्थानों पर पूरे हो चुके हैं, लेकिन पर्याप्त पानी के अभाव में धान बोवनी का कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। धान उत्पादक जिले के सक्ती, डभरा, जैजैपुर, मालखरौदा, बाराद्वार, हसौद और ग्रामीण अंचलों के किसान पिछले कई दिनों से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। सुबह और शाम बादलों की आवाजाही से बारिश की संभावना बनती है, लेकिन बादल बिना बरसे ही आगे बढ़ जा रहे हैं। लगातार बढ़ रही उमस और तेज धूप ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान दिनभर मौसम के मिजाज पर नजर बनाए हुए हैं और राहत की बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

खेत तैयार, लेकिन पानी के इंतजार में थमे कृषि कार्य :- 

खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों ने समय रहते खेतों की जुताई, समतलीकरण और मेढ़बंदी का कार्य पूरा कर लिया है। कई किसानों ने धान की नर्सरी भी तैयार कर ली है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण रोपा और बोवनी का काम शुरू नहीं हो पाया है। कुछ क्षेत्रों में किसानों ने शुरुआती बारिश के भरोसे बीज डालने की तैयारी की थी, लेकिन बारिश नहीं होने से वे अब जोखिम लेने से बच रहे हैं।

मानसून की देरी से बढ़ी चिंता, उत्पादन पर पड़ सकता है असर :- 

जिले की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है और धान यहां की प्रमुख फसल है। ऐसे में मानसून की सुस्त चाल किसानों की चिंता का कारण बनती जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की बुआई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी भी किसानों को उम्मीद है कि मानसून सक्रिय होने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।

खाद-बीज केंद्रों में बढ़ी हलचल, किसान कर रहे तैयारी :- 

मानसून के इंतजार के बीच किसान खरीफ सीजन की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते। सेवा सहकारी समितियों और कृषि केंद्रों में खाद एवं बीज के उठाव में तेजी देखी जा रही है। किसान उन्नत किस्म के बीज और उर्वरक लेकर बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से भी आवश्यक सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बारिश नहीं होने से बढ़ रही उमस, जनजीवन भी प्रभावित :-

बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। जिले में पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और उमस भरे मौसम के कारण आमजन भी परेशान हैं। दिन में गर्मी और शाम को बादलों की आवाजाही से मौसम में बदलाव तो दिख रहा है, लेकिन बारिश नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। पेयजल स्रोतों और तालाबों में भी पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है।

किसानों की नजरें मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर :- 

किसान अब मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर बनाए हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा और अच्छी बारिश से खेतों में फिर से रौनक लौटेगी। फिलहाल गांवों में चौपालों से लेकर खेतों तक चर्चा का सबसे बड़ा विषय मानसून और बारिश ही बना हुआ है।

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