खाद और डीजल संकट से जूझ रहे किसान, समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
बाराद्वार। खरीफ सीजन की तैयारी के बीच खाद और डीजल की उपलब्धता को लेकर क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने बैठक आयोजित कर अपनी समस्याओं पर चर्चा की तथा प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर त्वरित समाधान की मांग की।
किसानों का कहना है कि बुआई का समय नजदीक है, लेकिन खाद एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से खेती-किसानी प्रभावित होने की आशंका है। किसानों ने आरोप लगाया कि खाद की कालाबाजारी और कृत्रिम कमी के कारण उन्हें निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
बैठक में किसानों ने बताया कि क्षेत्र के अनेक किसान केवल कृषि कार्य पर निर्भर हैं। समय पर खाद और डीजल नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। किसानों ने यह भी कहा कि खाद एवं डीजल से जुड़े नियमों में लगातार बदलाव होने से ग्रामीण अंचल के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, निजी विक्रेताओं की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए तथा कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाई जाए। इसके साथ ही कृषि कार्य में लगे किसानों को पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टर एवं अन्य कृषि वाहनों के लिए डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में किसान नेता रमेश कुमार चंद्रा, बोधसाय चंद्रा, अमर सिंह बनाफर, उमाशंकर चंद्रा, मदन लाल चंद्रा, दिनेश गबेल, मनोज कुमार, कमल प्रकाश चंद्रा, फिरतराम, सम्मेलाल बरेठ, संतोष कुमार चंद्रा, राजू बरेठ, दुर्गेश साहू, मनोज सिदार, राजकुमार मरावी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों की प्रमुख मांगें
खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सहकारी समितियों और अधिकृत केंद्रों में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए।
निजी खाद विक्रेताओं पर नियमित निगरानी रखी जाए।
किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराई जाए।
कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर एवं अन्य कृषि वाहनों को डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते खाद और डीजल की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खरीफ सीजन की खेती प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।




