बिरसा मुंडा राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक सम्मान से सम्मानित हुए प्रधान पाठक शैलकुमार पाण्डेय

सक्ती। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों को विद्यालयीन गतिविधियों से जोड़ने वाले शासकीय आदिवासी आश्रम मसनीयाकुर्द, सक्ती के प्रधान पाठक शैलकुमार पाण्डेय को प्रतिष्ठित “बिरसा मुंडा राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि से न केवल विद्यालय बल्कि पूरे सक्ती जिले में हर्ष का माहौल है।
यह सम्मान शिक्षा सागर फाउंडेशन द्वारा रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में देश के 18 राज्यों से चयनित उत्कृष्ट एवं नवाचारी शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों की उपलब्धियों को मंच से सराहा गया और शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा की गई।
प्रधान पाठक शैलकुमार पाण्डेय को विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त परिसर निर्माण, कम लागत में शिक्षण सामग्री तैयार करने तथा नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। उनके प्रयासों से विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता का भी प्रभावी विकास हुआ है।
वर्ष 2007 से शिक्षा सेवा में कार्यरत शैलकुमार पाण्डेय ने अपने समर्पण और नवाचार के माध्यम से आश्रम विद्यालय को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने विद्यालय को शून्य स्तर से विकसित कर एक प्रेरणादायी शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित किया। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सम्मान अर्जित किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान ने शैलकुमार पाण्डेय की वर्षों की मेहनत और समर्पण को नई पहचान दी है। साथ ही यह उपलब्धि सक्ती जिले और छत्तीसगढ़ के लिए भी गौरव का विषय बनी है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनके नवाचारी प्रयास अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
शिक्षा में नवाचार और समाजहित के कार्यों के लिए मिला यह राष्ट्रीय सम्मान साबित करता है कि समर्पित शिक्षक अपने प्रयासों से न केवल विद्यार्थियों का भविष्य संवारते हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रखते हैं।




