स्वामी अग्निवेश की शिष्या स्वामी अग्न्यानंदी पहुंचीं सक्ती, गुरु से जुड़ी स्मृतियों को किया नमन

भूटान यात्रा से पहले सक्ती प्रवास पर पहुंचीं डिवाइन अग्नि संगठन एसोसिएशन की चेयरपर्सन; कहा—मेरे लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं यह शहर
सक्ती। समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक चिंतक स्वामी अग्निवेश की शिष्या स्वामी अग्न्यानंदी 27 अगस्त को सक्ती प्रवास पर रहीं। भूटान यात्रा पर रवाना होने से पहले उन्होंने अपने गुरु स्वामी अग्निवेश से गहरा संबंध रखने वाली सक्ती की धरती पर पहुंचकर उनसे जुड़ी स्मृतियों को नमन किया और स्थानीय लोगों के बीच अपने विचार साझा किए।
हरिद्वार के श्री अरविंद योग मंदिर में करती हैं निवास
स्वामी अग्न्यानंदी वर्तमान में हरिद्वार स्थित श्री अरविंद योग मंदिर में निवास करती हैं। वे डिवाइन अग्नि संगठन एसोसिएशन की चेयरपर्सन हैं और संगठन के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में आध्यात्मिक एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश पहुंचा रही हैं।
मेरे लिए तीर्थस्थल के समान है सक्ती : स्वामी अग्न्यानंदी
स्वामी अग्न्यानंदी ने कहा कि सक्ती शहर का उनके गुरु स्वामी अग्निवेश के जीवन से अत्यंत गहरा संबंध रहा है। इसलिए सक्ती की धरती उनके लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है। यहां पहुंचकर उन्हें अपने गुरु की स्मृतियों, विचारों और समाज के प्रति उनके समर्पण को निकटता से अनुभव करने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा, “मेरे गुरु स्वामी अग्निवेश ने सत्य, न्याय, करुणा और प्रेम पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी। सक्ती से उनका गहरा आत्मीय एवं पारिवारिक संबंध रहा है। इस पावन धरती पर आना मेरे लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूति है।”
संन्यास के बाद वेपा श्याम राव बने स्वामी अग्निवेश
स्वामी अग्निवेश का मूल नाम वेपा श्याम राव था। उनका पालन-पोषण सक्ती रियासत के दीवान रहे उनके नाना एम. दशरथी राव के संरक्षण में हुआ। संन्यास ग्रहण करने के बाद वे स्वामी अग्निवेश के नाम से विख्यात हुए। उन्होंने अपना जीवन सामाजिक न्याय, बंधुआ मजदूरों की मुक्ति और शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
25 वर्षों से युवाओं को दिखा रहीं आध्यात्मिक जीवन की राह
स्वामी अग्न्यानंदी ने बताया कि गुरु स्वामी अग्निवेश से दीक्षा और प्रेरणा प्राप्त करने के बाद वे पिछले लगभग 25 वर्षों से भारत के विभिन्न राज्यों का भ्रमण कर रही हैं। इस दौरान वे सत्य, न्याय, करुणा और प्रेम के सिद्धांतों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए युवाओं को जीवन की सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
वे विशेष रूप से नौजवान पीढ़ी को अपनी आजीविका के प्रति आत्मनिर्भर बनने के साथ आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने की शिक्षा देती हैं। उनका मानना है कि भौतिक प्रगति और आध्यात्मिक चेतना के संतुलन से ही मनुष्य एक सार्थक, शांतिपूर्ण एवं सेवाभावी जीवन जी सकता है।
गुरु से मिली समाजसेवा की प्रेरणा
स्वामी अग्न्यानंदी ने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के प्रति संवेदनशीलता, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने तथा प्रेम एवं करुणा के साथ मानवता की सेवा करने की प्रेरणा उन्हें अपने गुरु से मिली। सक्ती प्रवास के दौरान उन्होंने लोगों से स्वामी अग्निवेश के विचारों को आत्मसात कर सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।




