सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : गरीब बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटा रहे सेवाभावी दंत चिकित्सक डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल, गुरुजनों की सीख, सेवा का संकल्प और जरूरतमंदों के लिए समर्पित जीवन

सक्ती जिले के लिए मिसाल बन रहे डॉक्टर आशुतोष जायसवाल
सक्ती। चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। जब कोई डॉक्टर अपने ज्ञान और कौशल को जरूरतमंदों के दर्द को कम करने के लिए समर्पित कर देता है, तब वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। सक्ती जिले के युवा एवं सेवा भावी दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल इसी सोच के साथ लगातार समाज सेवा में जुटे हुए हैं। अपनी चिकित्सा दक्षता, विनम्र व्यवहार, संवेदनशील सोच और जरूरतमंदों के प्रति समर्पण के कारण वे लोगों के बीच भरोसे, सेवा और मानवीय संवेदना का प्रतीक बनते जा रहे हैं। दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए डॉ. आशुतोष ने यह साबित किया है कि चिकित्सा केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना ही डॉक्टर का वास्तविक दायित्व है। वे अपनी सफलता और सेवा के संस्कार का श्रेय गुरुजनों के मार्गदर्शन, परिवार के संस्कार तथा समाज के आशीर्वाद को देते हैं।

गुरुजनों से मिली सीख ने बदली सोच, सेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य :-
डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल बताते हैं कि चिकित्सा विज्ञान में केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मरीज के दर्द को समझने की संवेदनशीलता और सेवा का भाव सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित रुगटा डेंटल कॉलेज में अध्ययन के दौरान ऐसे गुरुजनों का मार्गदर्शन प्राप्त किया, जिन्होंने उन्हें केवल दंत चिकित्सा तकनीक ही नहीं, बल्कि मानव सेवा और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार का महत्व भी सिखाया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. एस. फातिमा खान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उन्हें समाज के लिए कुछ बेहतर करने का संकल्प दिया।

गरीब बच्चों के लिए स्वास्थ्य शिविर, निःशुल्क उपचार और दवाइयों का वितरण :-
सेवा भावी डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल केवल अपने क्लीनिक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। वे दंत स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से बच्चों की जांच कर उन्हें निःशुल्क परामर्श, दवाइयां और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराते हैं। उनका मानना है कि आर्थिक स्थिति कभी भी किसी व्यक्ति के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए। यही कारण है कि वे गरीब परिवारों के बच्चों के उपचार में विशेष रुचि लेते हैं और जरूरत पड़ने पर नि:शुल्क उपचार भी उपलब्ध कराते हैं। उनके इन प्रयासों से कई बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है और अभिभावकों को राहत मिली है।

आदिवासी और दूरस्थ अंचलों तक पहुंची सेवा, पनारी, मसनिया और रैनखोल में दी चिकित्सा सेवाएं :-
डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल ने अपनी सेवाओं को शहर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक पहुंचकर स्वास्थ्य सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। पनारी, मसनिया और रैनखोल जैसे क्षेत्रों में जाकर उन्होंने स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों और बच्चों का उपचार किया। इन अंचलों में दंत संबंधी समस्याओं से परेशान बच्चों एवं ग्रामीणों को निःशुल्क जांच, आवश्यक दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी सलाह देकर राहत पहुंचाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच ऐसे डॉक्टरों की सेवा लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

चार वर्षीय बच्ची के गले में फंसा मछली का कांटा निकालकर बचाई परेशानी, जिले के लिए बनी उपलब्धि :-
डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल ने हाल ही में एक चार वर्षीय बच्ची का सफल उपचार कर मानवता और चिकित्सा कौशल का उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बच्ची के गले में मछली का कांटा फंस गया था, जिससे उसे काफी तकलीफ हो रही थी और स्थिति गंभीर बनती जा रही थी। संवेदनशीलता और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए डॉ. आशुतोष ने सावधानीपूर्वक उपचार कर बच्ची के गले से कांटा सफलतापूर्वक निकाल दिया। उपचार के बाद बच्ची को तत्काल राहत मिली। इसे न केवल चिकित्सकीय सफलता, बल्कि सक्ती जिले के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस तरह की जटिल स्थिति में समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

‘सेवा से मिलता है सच्चा सुख’ — डॉ. आशुतोष जायसवाल :-
डॉ. आशुतोष कुमार जायसवाल का कहना है कि डॉक्टर का कार्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को राहत देना और उनके जीवन में विश्वास जगाना भी है। वे कहते हैं कि जरूरतमंद लोगों की सेवा करने से जो आत्मिक संतुष्टि मिलती है, वही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। उनका कहना है, “सेवा से जो सच्चा सुख मिलता है, वह किसी सम्मान या उपलब्धि से कहीं अधिक बड़ा होता है। मैं हमेशा जरूरतमंद लोगों के लिए तत्पर रहूंगा और जहां भी आवश्यकता होगी, अपनी सेवाएं देता रहूंगा।”
मरीजों की मुस्कान को मानते हैं सबसे बड़ी उपलब्धि :-
डॉ. आशुतोष का मानना है कि किसी भी डॉक्टर की वास्तविक कमाई मरीज का विश्वास और उसके चेहरे पर लौटती मुस्कान होती है। उनका कहना है कि जब कोई मरीज दर्द से राहत पाकर संतोष महसूस करता है, तो वही डॉक्टर के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। आज वे अपने सेवा कार्यों, विनम्र व्यवहार और सामाजिक सरोकारों के कारण न केवल मरीजों का विश्वास जीत रहे हैं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बनते जा रहे हैं। उनकी सोच यह संदेश देती है कि सफलता तभी सार्थक होती है, जब उससे समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।





