53 करोड़ के सड़क नवीनीकरण कार्य में बिना रॉयल्टी खनिज खपाने की चर्चा तेज, रेत-मुरुम-गिट्टी के उपयोग पर उठे सवाल

टेमर से छपोरा तक बन रही सड़क में अनियमितता के आरोप, जांच और भुगतान रोकने की उठी मांग
सकर्रा। सक्ती जिले में मार्ग क्रमांक-16 अंतर्गत टेमर से छपोरा तक लगभग 53 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सड़क नवीनीकरण एवं नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण कार्य में बिना रॉयल्टी की रेत, मुरुम और गिट्टी उपयोग किए जाने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। ग्रामीणों एवं जानकारों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना में खनिज सामग्री के उपयोग और रॉयल्टी क्लियरेंस को लेकर कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे खनिजों का पूरा ब्यौरा और संबंधित रॉयल्टी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इससे शासन को राजस्व का भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
29 किलोमीटर सड़क और नाली निर्माण में खनिज स्रोत पर सवाल
जानकारी के अनुसार सड़क नवीनीकरण के साथ लगभग 29 किलोमीटर तक नाली निर्माण का कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है। हालांकि निर्माण में बड़ी मात्रा में उपयोग हो रहे रेत, मुरुम और गिट्टी कहां से लाई जा रही है, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे खनिजों की वैधता और रॉयल्टी भुगतान की जांच किए बिना ही काम जारी है। लोगों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की सूक्ष्म जांच नहीं हो जाती, तब तक ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाई जानी चाहिए।
“राजनीतिक पहुंच” के दावे से बढ़ी चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि संबंधित ठेकेदार की राजनीतिक पहुंच मजबूत होने के कारण उसके भुगतान पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने एमपीआरडीसी की क्वालिटी कंट्रोल एवं सुपरविजन विंग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठाई जा रही है कि जब तक रॉयल्टी क्लियरेंस और खनिज दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक निर्माण एजेंसी के बिलों का भुगतान रोका जाए।
सकर्रा सहित कई स्थानों पर डंप खनिज सामग्री बनी चर्चा का विषय
सकर्रा सहित विभिन्न स्थानों पर बड़ी मात्रा में गिट्टी और रेत डंप पड़े होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर यह सामग्री कहां से लाई गई और क्या इसके लिए वैध अनुमति एवं रॉयल्टी जमा की गई है।
मामले में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य में इतनी बड़ी मात्रा में खनिज सामग्री उपयोग हो रही है तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक उसका पूरा ब्यौरा क्यों नहीं मांगा गया।
रॉयल्टी चोरी से शासन को नुकसान की आशंका
जानकारों के अनुसार सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले रेत, गिट्टी और मुरुम जैसे खनिजों के लिए शासन द्वारा निर्धारित रॉयल्टी का भुगतान करना अनिवार्य होता है। बिना रॉयल्टी खनिज उपयोग किए जाने की स्थिति में राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि होती है।
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ ठेकेदार निर्माण लागत कम करने और अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से अवैध रूप से निकाली गई सामग्री का उपयोग करते हैं।
निर्माण गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
स्थानीय जानकारों का कहना है कि बिना मानक और बिना परीक्षण वाली सामग्री से तैयार सड़कें अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रहतीं। अमानक रेत और गिट्टी के उपयोग से सड़कें जल्द खराब होने लगती हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होती है और आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ती है।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और विभागीय कार्रवाई को लेकर लोगों की निगाहें संबंधित विभागों पर टिकी हुई हैं।



