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खाद वितरण में कटौती से किसानों की बढ़ी चिंता, खरीफ बोनी पर मंडराने लगा संकट

यूरिया और सुपर फास्फेट आधा मिलने से किसान परेशान, निजी दुकानों की ओर बढ़ा रुख

सक्ती। खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही जिले के किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद एवं प्रमाणित धान बीज का वितरण किया जा रहा है, लेकिन इस बार शासन की नई व्यवस्था के चलते खाद वितरण में भारी कटौती कर दी गई है। विशेष रूप से यूरिया और सुपर फास्फेट खाद में 50 प्रतिशत तक कमी किए जाने से किसानों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।

किसानों का कहना है कि पूर्व में प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया एवं दो बोरी सुपर फास्फेट उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन वर्तमान खरीफ सत्र में दोनों खाद केवल एक-एक बोरी ही दी जा रही है। इससे खेती की लागत और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

सहकारी समितियों में सीमित खाद, किसानों की लंबी कतारें

जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में खाद लेने पहुंच रहे किसानों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। किसानों का आरोप है कि समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है और सीमित वितरण के कारण उन्हें बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। कई किसानों को घंटों इंतजार के बाद भी जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि खरीफ फसल की तैयारी अपने अंतिम चरण में है और ऐसे समय खाद की कमी से बोनी कार्य प्रभावित हो सकता है। यदि समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिला तो इसका सीधा असर धान उत्पादन पर पड़ेगा।

निजी दुकानों से महंगा खाद खरीदने की मजबूरी

सहकारी समितियों में कटौती किए जाने के बाद अब किसानों को निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी दुकानों में खाद निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है।

किसानों का कहना है कि पहले ही खेती-किसानी की लागत लगातार बढ़ रही है, ऊपर से खाद की कमी और महंगे दामों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक चिंाजनक बनी हुई है।

पिछले वर्ष जैसी किल्लत की आशंका से बढ़ी बेचैनी

किसानों को आशंका है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी खाद संकट गहरा सकता है। बताया जा रहा है कि समितियों में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खाद का भंडारण नहीं किया गया है। ऐसे में खरीफ सीजन के चरम समय में खाद की भारी किल्लत उत्पन्न होने की संभावना जताई जा रही है।

ग्रामीण अंचलों में किसानों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराया गया तो बोनी प्रभावित होने के साथ उत्पादन लागत बढ़ेगी और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

प्रशासन की व्यवस्था पर टिकी किसानों की उम्मीद

अब किसानों की निगाहें जिला प्रशासन और कृषि विभाग की व्यवस्थाओं पर टिकी हुई हैं। किसानों का कहना है कि शासन को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराकर वितरण व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए ताकि किसानों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसानों की आवश्यकता के अनुरूप खाद उपलब्ध करा पाएगा या फिर किसानों को मजबूरन निजी दुकानों से ऊंचे दामों पर खाद खरीदकर खरीफ खेती करनी पड़ेगी।

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