बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, एक नल पर निर्भर वार्ड 6 और 7 के सैकड़ों लोग

बुंदेली में गहराया पेयजल संकट, घंटों कतार में खड़े रहने को मजबूर महिलाएं; जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप
अरुण कुमार निराला/सकर्रा। भीषण गर्मी के बीच ग्राम बुंदेली के वार्ड क्रमांक 6 और 7 में पेयजल संकट विकराल रूप धारण करता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि दोनों वार्डों के सैकड़ों ग्रामीण केवल एक नल के सहारे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। पानी भरने के लिए रोजाना घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन सुबह से ही पानी के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। खासकर महिलाओं को 2 से 3 घंटे तक लाइन में खड़े रहकर पानी भरना पड़ता है। कई बार पर्याप्त पानी नहीं मिलने से लोगों को खाली बर्तन लेकर लौटना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही समस्या और गंभीर होती जा रही है।
महिलाओं और बच्चों पर सबसे अधिक असर
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि एकमात्र नल पर निर्भरता के कारण उनका अधिकांश समय पानी की व्यवस्था में ही निकल जाता है। इससे घरेलू कार्यों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जलस्रोतों की कमी और पर्याप्त नल कनेक्शन नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
कई बार की शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान पेयजल व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनकी समस्याएं भुला दी गईं।
विधायक से लगाई गुहार
जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक से भी मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की है। ग्रामीणों ने वार्ड 6 और 7 में अतिरिक्त बोर खनन, नए नल कनेक्शन तथा स्थायी पेयजल व्यवस्था की मांग उठाई है। साथ ही गर्मी के मौसम में टैंकर के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पेयजल संकट का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भीषण गर्मी में ग्रामीणों को राहत मिल सके।
पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीण अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।




