बैलेट पेपर पर भी जनता ने नकारा, कब तक हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ेगी कांग्रेस?- लोकेश साहू

विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की असफलता पर लोकेश साहू का तीखा हमला, बोले—पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत
सक्ती। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद (MLC) चुनावों में कांग्रेस की कथित असफलता को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश मंत्री लोकेश साहू ने कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करने वाली कांग्रेस को अब चुनाव परिणामों से सबक लेते हुए अपनी हार के कारणों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
लोकेश साहू ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से ईवीएम (EVM) के जरिए होने वाले चुनावों पर सवाल उठाती रही है और बैलेट पेपर से मतदान की वकालत करती रही है। ऐसे में बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलना उसके लिए आत्ममंथन का विषय है।
उन्होंने दावा किया कि संबंधित राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी को एक भी सीट नहीं मिलने को उन्होंने विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल को अपनी असफलता के कारणों की समीक्षा करने के बजाय बार-बार चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाने से बचना चाहिए। जनता का जनादेश सर्वोपरि है और प्रत्येक राजनीतिक दल को उसका सम्मान करना चाहिए।
साहू ने कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि जब बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी पार्टी को सफलता नहीं मिली, तो अब वह अपनी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराएगी? उन्होंने कहा कि केवल आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक स्थिति नहीं बदलती। इसके लिए जनता के बीच विश्वास मजबूत करना और संगठनात्मक कमियों को दूर करना जरूरी है।
अंत में लोकेश साहू ने कहा कि कांग्रेस को बहानेबाजी छोड़कर अपनी राजनीतिक रणनीति, संगठन और जनसंपर्क की समीक्षा करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत है।
विस्तार से मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
• चुनाव का तरीका: यह चुनाव ईवीएम (EVM) के बजाय बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए कराए गए थे। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने की मांग करती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर तंज कसा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।
• कर्नाटक (जहां कांग्रेस की सरकार है): कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी पूर्ण बहुमत में है, लेकिन इसके बावजूद वह एमएलसी चुनावों में अपना खाता तक नहीं खोल सकी। यहां जेडीएस (JDS) उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के दिग्गज नेता पुत्तन्ना को हराकर बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट भी छीन ली।
• उत्तर प्रदेश: यूपी में समाजवादी पार्टी (SP) ने 4 सीटें जीतीं और एक सीट पर आगे रही, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी सीटें जीतीं। कांग्रेस यहाँ कोई सफलता हासिल नहीं कर सकी।
• महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी (NCP – Sharad Pawar) ने सीटें जीतीं और भाजपा गठबंधन का भी दबदबा रहा। कांग्रेस यहां खाली हाथ रही।
• बिहार: बिहार में प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ का भी खाता खुला और अन्य दलों व एनडीए को सफलता मिली, लेकिन कांग्रेस यहाँ भी कोई सीट नहीं जीत पाई।
• पार्टी के लिए झटका: राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी विरोधी दलों के अनुसार, कर्नाटक जैसे राज्य में सत्ता में होने के बावजूद और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने पर भी एक भी सीट न जीत पाना कांग्रेस संगठन के लिए एक बड़ा और आत्ममंथन वाला झटका माना जा रहा है।




