सक्ती जिला

बेटी के मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो सम्मान लौटाएंगे वरिष्ठ पत्रकार अनिल तंबोली

15 अगस्त को एसपी के हाथों मिले प्रशस्ति पत्र को लौटाने का ऐलान

सक्ती, 09 अगस्त 2026। करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय सक्ती के वरिष्ठ पत्रकार एवं सीजीवेबन्यूज डॉट इन के संपादक अनिल तंबोली ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने पुलिस और पत्रकारिता जगत में चर्चा छेड़ दी है। तंबोली ने सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर द्वारा उन्हें प्रदान किए गए प्रशस्ति पत्र को आगामी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वापस लौटाने का ऐलान किया है।

पत्रकार तंबोली का कहना है कि सम्मान लौटाने का निर्णय किसी व्यक्तिगत नाराजगी के कारण नहीं, बल्कि उनकी बेटी की शिकायत पर कथित तौर पर अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं होने से व्यथित होकर लिया गया है।

29 मई को शिकायत, 27 जून को काउंसलिंग, फिर भी कार्रवाई का इंतजार

अनिल तंबोली के अनुसार, उनकी बेटी ने 29 मई 2026 को सक्ती थाने में दहेज और मानसिक उत्पीड़न से संबंधित शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले को परिवार परामर्श केंद्र भेजा गया, जहां 27 जून को पति-पत्नी की काउंसलिंग हुई।

तंबोली के मुताबिक, काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद थाने में आगे की कार्रवाई के लिए जाने की सलाह दी गई। उनका कहना है कि 29 जून को परिवार परामर्श केंद्र सक्ती से बयान की प्रति सक्ती थाने भेज दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

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“दो महीने से अधिक बीत गए, लेकिन प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई”

पत्रकार अनिल तंबोली का आरोप है कि मामले में दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उन्होंने इस स्थिति को लेकर सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।

उनका कहना है कि जब एक महिला द्वारा दहेज और मानसिक उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायत की जाती है और परिवार परामर्श केंद्र की प्रक्रिया के बाद भी विवाद का समाधान नहीं होता, तब मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में कार्रवाई में कथित देरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, मामले में पुलिस का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई और वर्तमान में पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई चल रही है, इसका आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

“25 साल पत्रकारिता की, दूसरों के लिए आवाज उठाई, आज अपनी बेटी के लिए भटक रहा हूं”

अनिल तंबोली ने कहा कि उन्होंने करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं को उठाया है। अनेक मामलों में पीड़ितों की आवाज प्रशासन और पुलिस तक पहुंचाने का काम किया। लेकिन जब मामला अपनी बेटी का आया तो उन्हें स्वयं थाना, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इसी पीड़ा और असहज स्थिति के चलते उन्होंने पुलिस अधीक्षक द्वारा दिए गए सम्मान को वापस करने का निर्णय लिया है।

एसपी से पूछा—सम्मान देने में गलती हुई या थाना प्रभारी चुनने में?

पत्रकार तंबोली ने पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर से सीधे दो सवाल किए हैं। उनका कहना है कि या तो सम्मान देने के लिए गलत व्यक्ति का चयन किया गया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले पर आत्ममंथन करने की अपील की है।

“मुझे किसी पुलिस अधिकारी से व्यक्तिगत शिकायत नहीं”

अनिल तंबोली ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी पुलिस अधिकारी से व्यक्तिगत शिकवा या शिकायत नहीं है। उनका कहना है कि उनके मन में केवल एक सवाल है—जब उनकी बेटी की शिकायत पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आखिर इसकी वजह क्या है?

उन्होंने कहा कि वे इस सवाल का जवाब चाहते हैं और इसी मुद्दे को सामने रखने के लिए सम्मान लौटाने का निर्णय लिया है।

15 अगस्त को सार्वजनिक रूप से लौटाएंगे सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार अनिल तंबोली के अनुसार, वे 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के समक्ष सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर द्वारा दिए गए प्रशस्ति पत्र को सादर वापस करेंगे।

अब इस मामले में सबकी निगाहें 15 अगस्त पर टिकी हैं। एक ओर वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार द्वारा सम्मान लौटाने का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर उनकी बेटी की शिकायत और उस पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों का पुलिस विभाग की ओर से क्या जवाब आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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