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फगुरम सोसायटी में घमासान! प्रभारी संस्था प्रबंधक को लेकर छिड़ी जंग

सप्ताह भर से ठप पड़ा खाद और केसीसी वितरण

फगुरम। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ जहां जिले की अधिकांश सहकारी समितियों में किसानों को खाद और केसीसी ऋण का वितरण तेजी से किया जा रहा है, वहीं फगुरम सहकारी समिति इन दिनों अंदरूनी विवाद और प्रशासनिक खींचतान का अखाड़ा बन चुकी है। प्रभारी संस्था प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर छिड़े विवाद ने पूरी व्यवस्था को जाम कर दिया है। हालत यह है कि पिछले लगभग 2 सप्ताह से समिति में खाद वितरण बंद पड़ा है और किसानों को केसीसी ऋण भी नहीं मिल पा रहा है।

खेती-किसानी के सबसे महत्वपूर्ण समय में समिति का कामकाज ठप होने से किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। रोजाना दर्जनों किसान समिति पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन देकर वापस भेजा जा रहा है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और कर्मचारियों की आपसी लड़ाई का खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

ट्रांसफर के बाद शुरू हुआ विवाद :- 

जानकारी के अनुसार 13 मई को फगुरम समिति के संस्था प्रबंधक चिरंजीवी सोनवानी का स्थानांतरण गोतरा शाखा मस्तूरी कर दिया गया। इसके बाद चंद्रकांत दर्शन को प्रभारी संस्था प्रबंधक नियुक्त किया गया। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

सूत्रों के मुताबिक समिति कर्मचारी महेश जायसवाल ने इस नियुक्ति का खुलकर विरोध शुरू कर दिया। उनका दावा है कि शासन के नियमों के अनुसार वरिष्ठ कर्मचारी को संस्था प्रबंधक बनाया जाना चाहिए था, लेकिन नियमों को नजरअंदाज करते हुए गुपचुप तरीके से चंद्रकांत दर्शन की नियुक्ति कर दी गई।

चेकबुक और रजिस्टर पर अटका पूरा सिस्टम :- 

विवाद अब इतना बढ़ चुका है कि समिति की केसीसी चेकबुक, प्रस्ताव रजिस्टर सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी भी महेश जायसवाल के कब्जे में बताए जा रहे हैं। आरोप है कि नए प्रभारी संस्था प्रबंधक को ये दस्तावेज नहीं सौंपे जा रहे हैं, जिसके कारण पूरी समिति का कामकाज ठप पड़ा हुआ है। इधर नव नियुक्त प्रभारी संस्था प्रबंधक चंद्रकांत दर्शन लगातार दस्तावेजों की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है। मामले की शिकायत समिति अध्यक्ष योगेश राठौर द्वारा उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है, बावजूद इसके अब तक समाधान नहीं निकल सका है।

किसान बोले – “कर्मचारियों की लड़ाई में बर्बाद हो रही खेती” :- 

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन शुरू हो चुका है और खेतों की तैयारी तेजी से चल रही है। ऐसे समय में खाद नहीं मिलने से खेती प्रभावित हो रही है। कई किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिले की अन्य समितियों में खाद और केसीसी आसानी से मिल रहा है, लेकिन फगुरम समिति में केवल विवाद और राजनीति चल रही है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द खाद :- 

वितरण और केसीसी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि समय पर खाद और ऋण नहीं मिला तो बोनी प्रभावित होगी और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।

जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल :- 

पूरा मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ किसान परेशान हैं, दूसरी तरफ समिति के अंदर चल रहा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में अब सबकी निगाहें जिला सहकारी विभाग और प्रशासन पर टिकी हुई हैं कि आखिर किसानों को राहत कब मिलेगी।

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