उत्कर्ष योजना बंद करने के फैसले के विरोध में छात्रों-युवाओं का प्रदर्शन, योजना बहाल करने की मांग

अरुण कुमार निराला/सक्ती। मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) को बंद किए जाने के निर्णय के विरोध में छात्रों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए योजना को पूर्ववत जारी रखने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि यह योजना वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मजबूत आधार रही है। योजना के माध्यम से हजारों छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल कर अपने सपनों को साकार किया है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी भी प्रारंभ कर दी थी। ऐसे समय में योजना को बंद करने की सूचना से छात्रों और उनके अभिभावकों में निराशा और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
युवाओं का कहना है कि उत्कर्ष योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद है। यदि इसे बंद किया गया तो अनेक मेधावी छात्र बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी अवसरों से वंचित हो सकते हैं।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से हस्तक्षेप कर योजना को पुनः संचालित करने तथा विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों की भावनाओं और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी।




