भाई की हत्या के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास
अकलसरा में टांगी से वार कर की थी हत्या, प्रथम अपर सत्र न्यायालय सक्ती का फैसला

सक्ती। सक्ती जिले के बाराद्वार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अकलसरा में हुए हत्या के चर्चित मामले में न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सक्ती प्रशान्त कुमार शिवहरे ने अपने निर्णय में आरोपी धनीराम शिकारी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास एवं एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रकरण के अनुसार 25 जून 2025 को ग्राम अकलसरा निवासी मनोहर दास महंत ने थाना बाराद्वार में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव के मनीराम शिकारी की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलने पर वह मृतक के घर पहुंचा, जहां परछी में शव रखा हुआ था। शव का निरीक्षण करने पर सिर में गंभीर चोट के निशान पाए गए।
जांच के दौरान मृतक के 12 वर्षीय पुत्र राजू शिकारी ने बताया कि 24 जून 2025 की रात उसके पिता मनीराम शिकारी और बड़े पिता धनीराम शिकारी के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान धनीराम शिकारी ने घर के सामने इमली पेड़ के नीचे टांगी से सिर पर वार कर मनीराम की हत्या कर दी थी।
रिपोर्ट के आधार पर थाना बाराद्वार में अपराध दर्ज कर पुलिस ने विवेचना प्रारंभ की। पोस्टमार्टम में सिर पर कठोर वस्तु से प्रहार के कारण मृत्यु होना पाया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी धनीराम शिकारी ने अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसके मेमोरेंडम कथन के आधार पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की टांगी बरामद की गई। घटनास्थल से रक्तरंजित मिट्टी एवं अन्य साक्ष्य भी जब्त किए गए।
पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 साक्षियों के बयान दर्ज कराए, जिनके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने आरोपी धनीराम शिकारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास एवं 1,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से उदय कुमार वर्मा ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय के इस फैसले को हत्या जैसे गंभीर अपराधों के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा




