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शब्दों का साधक हुआ मौन, नहीं रहे वरिष्ठ साहित्यकार-कवि एल.आर. जायसवाल, सक्ती के साहित्य और संस्कृति जगत में छाई शोक की लहर

86 वर्ष की आयु में निधन, 2 सितंबर को सुबह 9 बजे सक्ती मुक्तिधाम में होगा अंतिम संस्कार

सक्ती। सक्ती के साहित्यिक, सांस्कृतिक और शिक्षा जगत ने अपनी एक ऐसी शख्सियत खो दी, जिनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी। वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, सांस्कृतिक विकास मंच सक्ती के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त व्याख्याता एल.आर. जायसवाल का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही नगर सहित साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार 2 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे सक्ती मुक्तिधाम में किया जाएगा।

एल.आर. जायसवाल केवल एक शिक्षक या साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वे सक्ती की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना के मजबूत स्तंभ थे। उन्होंने जीवन भर शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों का भविष्य संवारा और साहित्य के माध्यम से समाज की भावनाओं एवं संवेदनाओं को शब्द दिए। उनकी रचनाओं, विचारों और सहज व्यक्तित्व में जीवन के अनुभवों की गहराई दिखाई देती थी।

शब्दों का वह साधक अब हमेशा के लिए मौन

जिनकी आवाज साहित्यिक मंचों पर लोगों को बांध लेती थी, जिनकी उपस्थिति से कवि गोष्ठियां और सांस्कृतिक आयोजन जीवंत हो उठते थे, आज वही आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई। उनके निधन से सक्ती की साहित्यिक परंपरा में एक ऐसी रिक्तता पैदा हुई है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

सांस्कृतिक विकास मंच सक्ती के माध्यम से उन्होंने वर्षों तक साहित्य, कविता और संस्कृति की ज्योति जलाए रखी। वरिष्ठ रचनाकारों का सम्मान करने के साथ वे नई पीढ़ी के कवियों और साहित्यकारों को आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित करते रहे।

विद्यार्थियों को दिए संस्कार, समाज को दिए शब्द

एक व्याख्याता के रूप में उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार दिए। साहित्यकार और कवि के रूप में उन्होंने शब्दों के माध्यम से समाज को सोचने और संवेदनशील बने रहने का संदेश दिया। उनका सरल, सहज, आत्मीय और स्नेहिल स्वभाव उन्हें हर वर्ग के लोगों से जोड़ता था।

यादों और शब्दों में हमेशा जीवित रहेंगे

एल.आर. जायसवाल भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके शब्द, उनके संस्कार, उनकी रचनात्मकता और साहित्य-संस्कृति के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन सक्ती के साहित्य एवं सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

उनके निधन पर साहित्यकारों, कवियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े लोगों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

विनम्र श्रद्धांजलि…
ॐ शांति।

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