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बाराद्वार के युवाओ द्वारा निःस्वार्थ भाव से की जा रही गौ सेवा

बाराद्वार – नगर के युवाओ द्वारा दिन रात गौ माता की सेवा निःस्वार्थ भाव से लगातार की जा रही है, ऐसा ही एक ताजा मामले में युवाओ ने नेशनल हाईवे में घायल गौ माता का रेस्क्यु कर उसकी जान बचाई है। गुरूवार की रात्रि नेशनल हाईवे मुक्ताराजा में एक गौ माता अत्यंत गंभीर होने की सूचना नगर के गौ भक्तो को मिली, जिस पर अविलंब मौके पर पहॅूचकर युवाओ ने गौमाता को सकरेलीभांठा में स्थित गौ सेवा धाम लाया गया एवं उसका ईलाज शुरू किया गया। गौ माता गर्भ से थी एवं उसके पेट में 2 दिनो से बछडा फंसा हुआ था व गौ माता की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। गौ भक्तो ने अविलंब विशेषज्ञ डॉक्टरो की टीम को बुलाया गया, जिसके बाद सकरेलीभांठा में स्थित गौधाम में गंभीर रूप से घायल गौ माता के ईलाज हेतू डॉ श्रद्धा दिवान, अनिल नवरत्न, मनोज धीरहे, खीकराम राठौर सहित मालखरौदा और सक्ती के पशु चिकित्सक विशेषज्ञों की टीम पहॅूची एवं गौ माता का ईलाज प्रारंभ किया, गौसेवको की मदद से डॉक्टरो की टीम ने करीब 9 घण्टे की कडी मशक्कत के बाद ऑपरेशन करते हुए गौ माता की जान बचाई गई, लेकिन पेट में फंसे बछडे को नही बचाया जा सका। अंत में स्थानीय गौ सेवको ने सभी डॉक्टरों व टीम के सदस्यों व सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

युवाओं द्वारा निःस्वार्थ भाव से की जा रही गौ माता की सेवा, समाज के लिए बनी प्रेरणा –
आज जहां युवा पीढ़ी पर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, वहीं बाराद्वार के कुछ युवा निःस्वार्थ भाव से गौ माता की सेवा कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। शहर के गौ सेवा से जुड़े 15-20 युवाओ के द्वारा रोज सुबह-शाम बेसहारा और बीमार गायों की देखभाल करते हैं। इन युवाओं का दिन गौधाम की सफाई, गायों को चारा-पानी देने, बीमार गायों का उपचार करवाने और सड़क दुर्घटना में घायल गायों को सुरक्षित गौधाम तक पहुंचाने एवं उनकी सेवा करने से शुरू होता है। खास बात यह है कि ये सभी युवा छात्र या नौकरी पेशा हैं। अपनी पढ़ाई और नौकरी के बाद बचे समय को ये गौ सेवा में लगाते हैं। समूह के सदस्य राजशेखर शर्मा ने बताया कि गौ माता में 33 करोड देवी-देवताओं का वास माना गया है, इनकी सेवा करना हमारे लिए धर्म और कर्तव्य दोनों है। युवाओं की इस पहल से प्रभावित होकर अब कई स्थानीय लोग भी गौ माता की सेवा करने में सहयोग देने आगे आने लगे है। वही इन युवाओं की वजह से पिछले 6 महीने में सडक हादसे में 20 से ज्यादा घायल गायो की जान बचाई जा सकी है। गौ सेवको का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और गौ महिमा से जोड़ना भी है। ये युवा साबित कर रहे हैं कि सेवा का कोई उम्र नहीं होती, बस भाव सच्चा होना चाहिए। इनकी निःस्वार्थ सेवा आज के समाज के लिए एक प्रेरणा है। बताते चले कि सकरेलीभांठा में स्थित श्री श्याम राईस मील परिसर में भी गौधाम संचालित है, जहां बीमार एवं असहाय गौ माताओ की देखरेख एवं उनका लालन पालन किया जाता है। मील प्रबंधक एवं नगर के युवाओ की टीम के द्वारा निःस्वार्थ भाव के साथ मील परिसर में संचालित गौधाम में अभी 30 गौ माताऐ है, जिनके सेवा के लिए युवाओ की टीम जूटी हुई है।

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